तन्हाईयों की आह में , एक राज मैंने पाया है,
जिंदगी क्या चीज है, यह अब समझ में आया है.
रास्ते भर साथ अपने , कारवां भी था मगर,
अब लगा कि साथ मेरे ,बस ये अपनी काया है.
रोज जिनके आंसुओं के , लिए खून दे दिया,
अब लगा इन आंसुओं ने, बस मुझे नचाया है.
चाँदनी भी खिल रही है, अब तो देखो हर जगह,
अपनी ही किस्मत में कहो, कुहरों की घनी साया है.
मतलबपरस्त दुनिया में, गैरों की बात क्या करें,
जब यहाँ अपनों ने भी, मुझे इस कदर रुलाया है.
अश्कों से भींगे नयन देख, लोगों ने यहाँ यह कहा,
फड़क रही है, जरूर कोई शुभ घडी हीं आया है.
हम किसी को दोष दें, तो भी निकाले क्या कसर ,
जब खुदा ने यह मुकद्दर, मेरे नाम से बनाया है.
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