दूख़ में बाबा, सुख में बाबा,
सब कोई सुमिरै, बाबा-बाबा,
नहीं जाता, कोई काशी-काबा,
जब से आये , रामदेव बाबा.
रोगी के भी डॉक्टर बाबा,
भोगी के भी डॉक्टर बाबा,
योगी के भी डॉक्टर बाबा,
ढोंगी के भी डॉक्टर बाबा.
जो डॉक्टर थे माला-माल,
मक्खी मारते हैं बेहाल,
रोज सुनाते , अपना हाल,
योगी बाबा, उनके काल .
कहीं शीर्षासन , कहीं वज्रासन,
हर घर में , जमता है आसन,
वे सब करते हैं, नौकासन,
जिनका पेट था बना सिंहासन.
बस में जाइए , वहाँ भी आसन,
कोई ट्रेन में , करता आसन,
बाबा का है, ऐसा शासन,
पुस्तक में भी, हुआ प्रकाशन.
जय बाबा का, हुआ यूँ नाम,
भूल गए सब , जय हनुमान,
फ़ल वालों की बंद दूकान,
कद्दू-ककड़ी की बढ़ गयी मांग.
बाबा नाम की मची है लूट,
दवाओं में , देते वे छूट,
जनता पड़ी है , ऐसे टूट,
मरू-भूमि में जैसे,मिला हो ऊंट.
बाबा बन गए टेलि-बाबा,
सीडी में भी, आते बाबा,
दिल्ली से लन्दन तक बाबा,
ऐसे छाये , जैसे ढाबा.
सबके तुम हो , रक्षक बाबा,
रोगों के हो, भक्षक बाबा,
मेरी गलती , माफ़ हो बाबा,
जय हो तेरी, जय हो बाबा.
वाह-वाह।
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