Friday, September 14, 2012

आखिरी आरज़ू

इतने दिनों तक, तुमने,
कुछ भी नहीं कहा,
अकेले ही, तुमने,
कितना कुछ सहा,
अन्दर-ही-अन्दर,
थामे रहे, समंदर।
जबकि, तुम्हें तो खबर थी,
मैं थी, लाईलाज,
कुछ दिनों की, मोहताज।

नसों में दौड़ता, जहर,
कीमोथेरेपी का, असर,
कब तक मुझे बचाएगा?
चंद दिन, चंद हफ्तें,
फिर सब ख़त्म, हो जाएगा।
आँखों से बहता नीर,
यह क्षत-विक्षत, शरीर।
जिसके लिए, तुमने,
दाँव पर, लगा दी,
जीवनभर की कमाई,
मगर बदल न पाए,
किस्मत की, जुदाई।

सोचती हूँ मैं-
क्यों रही मैं, जिंदा,
महीनों तक अचल,
रुबरूँ होती रही,
प्रतिक्षण उस, मौत से,
जैसे अपनी सौत से।
जो मेरे इस, जिस्म को,
तुमसे अलग, कर देगी।
इस अभागी, देह का,
हर ज़ख्म भी, भर देगी।

मांगती हूँ मैं-
ले चलो, मुझे अब,
इस शहर से दूर,
जहाँ मैं, देख पाऊँ,
फिर से तुम्हारी आँखों में,
वही चमकता नूर।
कितना दर्द होगा,
मैं सब, सहन कर लूँगी,
पहनकर, तुम्हें साँसों में,
यह आँचल, भर लूँगी।
देखना! यह आरज़ू,
कुछ ऐसा, असर लाएगी।
जिंदगी की सांझ भी,
आँखों से उतर जाएगी।
है मुझे, इतना यकीं,
कुछ दिनों तक, हीं सही,
                    यह मौत, ठहर जाएगी....................

Sunday, August 26, 2012

तुमने कहा था

पूछती हूँ तुमसे-
क्यों रही मैं, बेकल,
जबकि मैं, तुम्हारी थी।
सर्वस्व तुमपर, हारी थी।
वह बाँहों, का हार,
वह रूप, और श्रृंगार,
जो सिर्फ, तुम्हारा था।
प्रकृति ने तो मुझे, बस,
 साँचें में, उतारा था।
फिर वासंती, रंगों से,
यौवन की, उमंगों से,
तुमने मुझे, निखारा था।


अभी-भी याद है, मुझे-
प्रथम, प्रणय संगीत,
नूतन, तुम्हारे अधरों से,
छलकता हुआ, प्रीत।
सहेज भी न पायी थी,
कितनी मैं, घबरायी थी।
फिर बांधा था, मैने,
उसे अपने, आंचल में,
आँखों के, काजल में,
सावन के, बादल में।

कैसे मैं भूलूँ-
महकती हुई, रातें,
आँखों ने, आँखों से,
जब की, थी बातें।
फिर चुप-सी धड़कन को,
साँसों ने छुआ था,
उसी क्षण, मेरा,
पुनर्जन्म, हुआ था।
क्या सब-कुछ व्यर्थ था?
या, उनका कोई अर्थ था?

तुम क्या जानो-
नारी-हृदय की आशा,
उस प्रेम की, परिभाषा।
सहस्त्रों तूफानों से,
रोज यह, टकराती है,
हर गुजरती, शाम में,
यह, टूट-टूट जाती है।
मगर, न जाने क्यों,
उन्हीं अधूरे स्वप्नों को,
तार-तार, अपनों को,
फिर, जोड़ने लग जाती है।

जानती हूँ, मैं भी,
है, युगों की प्रतीक्षा,
और अनवरत, परीक्षा,
मगर, ह़ृदय की आशा,
शायद, तुम आओगे,
वह वादा, निभाओगे,
जो कभी मुझसे-
तुमने कहा था................